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ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करे सरकार: छिंदवाड़ा में 84 जातियों ने एकजुट होकर निकाली महारैली, कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन

पवार मंगल भवन से कलेक्ट्रेट तक गूंजे सामाजिक न्याय के नारे; 27% आरक्षण बहाली, 13% होल्ड पदों पर निर्णय और जातिवार जनगणना की मांग

छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27 प्रतिशत आरक्षण को निरस्त किए जाने के बाद जिले में व्यापक आक्रोश देखने को मिला। छिंदवाड़ा के इतिहास में पहली बार ओबीसी वर्ग के अंतर्गत आने वाली 84 जातियों के प्रबुद्धजन और युवा एक मंच पर एकजुट हुए और एक विशाल महारैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। रैली के उपरांत राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 12 सूत्रीय मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।

पवार मंगल भवन से कलेक्ट्रेट तक जोरदार प्रदर्शन महारैली की शुरुआत पवार मंगल भवन से हुई। भारी संख्या में जुटे विभिन्न जातियों के प्रतिनिधियों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सामाजिक न्याय और अपने संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। रैली मुख्य मार्गों से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची, जहां उपस्थित जनसमूह ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कदम उठाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल आरक्षण का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य, समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व का सवाल है।

सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने की मांग ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की विधायी पहल की गई थी, जिसे हाल ही में उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि राज्य सरकार न्यायिक आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर तत्काल उसका विधिक परीक्षण कराए और सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर 27% आरक्षण की वैधानिकता बहाल कराने के लिए ठोस पैरवी करे।

13 प्रतिशत होल्ड पदों की स्थिति हो सार्वजनिक ज्ञापन में भर्तियों में रोके गए 13 प्रतिशत पदों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मांग की गई कि विभिन्न विभागों में अटकी भर्ती परीक्षाओं, परिणामों और नियुक्तियों की स्थिति तुरंत सार्वजनिक की जाए। न्यायालय के आदेशों और सेवा नियमों के तहत बिना किसी भेदभाव के सभी अभ्यर्थियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए पारदर्शी निर्णय लिया जाए।

आगामी जनगणना में हो पृथक ओबीसी कॉलम प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग रखी कि आगामी राष्ट्रीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग की गणना के लिए स्पष्ट और पृथक जातिवार कॉलम शामिल किया जाए। जातियों और उपजातियों के मानकीकरण की पारदर्शी प्रक्रिया तय हो, जिससे प्राप्त प्रामाणिक आंकड़ों का उपयोग सामाजिक कल्याण, शिक्षा और रोजगार की नीतियां बनाने में किया जा सके।

15 दिनों में कार्ययोजना स्पष्ट करे सरकार ज्ञापन में इंदिरा साहनी, एम. नागराज और जनहित अभियान जैसे संविधान पीठ के फैसलों का हवाला देते हुए आरक्षण व्यवस्था को विधिक संरक्षण देने की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि ज्ञापन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर सरकार अपनी प्रस्तावित कानूनी कार्यवाही और लंबित पदों पर कार्ययोजना सार्वजनिक करे। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय के अग्रदूतों और महापुरुषों को भारत रत्न, पद्म सम्मान देने तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में उनके योगदान को शामिल करने का भी अनुरोध किया गया है।

खबर : करण विश्वकर्मा – 9755432229