छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी सियासत में जबरदस्त भूचाल आ गया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली और किसान विरोधी रवैये से नाराज होकर भाजपा की प्राथमिक एवं सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अमित सक्सेना ने भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव को सीधे तौर पर अपना त्यागपत्र भेजते हुए पार्टी आलाकमान पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
किसानों के लिए उठाई आवाज तो थमा दिया अनुशासनहीनता का नोटिस!
पत्र में अमित सक्सेना ने बताया कि छिंदवाड़ा जिले और उनके क्षेत्र में कम बारिश के चलते सूखे के हालात बन गए हैं। जब उन्होंने ग्रामीण इलाकों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को लेकर छिंदवाड़ा में प्रदर्शन किया, तो पार्टी ने उनका साथ देने के बजाय उल्टा उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस थमा दिया।
हद तो तब हो गई जब भाजपा जिला कार्यालय से फोन कर अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं को किसान संघर्ष में शामिल होने से मना कर दिया गया। सक्सेना ने कहा कि इस तरह के बर्ताव से उनके आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंची है।
‘जनता की आवाज दबाने की कोशिश मंजूर नहीं’
इस्तीफे में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने साफ लिखा कि आंदोलन के बावजूद भाजपा संगठन और मध्य प्रदेश शासन की ओर से कोई ठोस कदम या सहयोग नहीं मिला। आगे भी जनता और किसानों के हक की आवाज दबाने का प्रयास किया जा सकता है, जो उन्हें कतई मंजूर नहीं है।
अमित सक्सेना ने दो टूक कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे किसानों और जनहित की लड़ाई आगे भी लड़ते रहेंगे और इसी वजह से वे स्वेच्छा से भाजपा को अलविदा कह रहे हैं।
सियासी हलकों में मची खलबली
जिला पंचायत उपाध्यक्ष के इस कड़े कदम के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। किसानों के सवाल पर पार्टी के अपने ही वरिष्ठ जनप्रतिनिधि द्वारा बगावत कर इस्तीफा देना भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि संगठन इस इस्तीफे पर क्या डैमेज कंट्रोल करता है।
खबर : करण विश्वकर्मा – 9755432229








