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छिंदवाड़ा में ग्राम रोजगार सहायकों का हल्लाबोल: मांगे पूरी न होने पर 2 अक्टूबर से उग्र आंदोलन की चेतावनी

छिंदवाड़ा कलेक्ट्रेड में ज्ञापन सौंपकर उठाई आवाज; 800 परिवारों के भविष्य पर संकट का हवाला, अतिरिक्त कार्यों के लिए लिखित आदेश और मानदेय की मांग।

छिंदवाड़ा। ग्राम पंचायत सहायक सचिव कर्मचारी संगठन एवं ग्राम रोजगार सहायक संघ (संयुक्त मोर्चा) जिला छिंदवाड़ा ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी समस्याओं से परेशान कर्मचारियों ने कलेक्टोरेट कार्यालय तक विशाल रैली निकालकर मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा कलेक्टर छिंदवाड़ा के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 2 अक्टूबर से छिंदवाड़ा जिले में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और अतिरिक्त काम के बोझ के कारण जिले के लगभग 800 ग्राम रोजगार सहायकों और उनके परिवारों का जीवन संकट में आ पड़ा है।

क्या हैं मुख्य मांगें?

ज्ञापन के माध्यम से संघ ने दो प्रमुख प्रशासनिक निर्देशों का हवाला देते हुए अपनी मांगें रखी हैं:

  • बिना विभागीय सहमति के न लिया जाए अन्य कार्य (बिंदु A): पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व दिशा-निर्देशों (पत्र क्रमांक 3206, दिनांक 19.10.2020) का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि राज्य स्तर से बिना विभागीय सहमति के ग्राम रोजगार सहायकों को अन्य विभागों या योजनाओं के काम में न लगाया जाए। यदि जनहित में ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना के अलावा ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना’ जैसे अन्य काम कराए जाना जरूरी है, तो इसके लिए भोपाल स्तर से स्पष्ट पदनाम के साथ लिखित आदेश जारी किए जाएं।
  • अतिरिक्त कार्य का मिले निर्धारित मानदेय (बिंदु B): मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद भोपाल की मार्गदर्शिका (पत्र क्रमांक 1122, दिनांक 24.06.2025) का संदर्भ देते हुए मांग की गई कि यदि रोजगार सहायकों से मूल योजना के अतिरिक्त अन्य कार्य लिया जाता है, तो उसके लिए अतिरिक्त पारिश्रमिक/मानदेय की दरें तय की जाएं और एक निश्चित समयावधि में भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

धरातल पर काम कोई करे, श्रेय और पैसा किसी और को

संघ ने अपने ज्ञापन के निष्कर्ष में दर्द बयां करते हुए कहा कि धरातल पर कई वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है कि वास्तविक काम ग्राम रोजगार सहायक करते हैं, लेकिन कार्य का श्रेय और उसका अतिरिक्त मानदेय या प्रोत्साहन राशि अन्य विभागों या कर्मचारियों के खाते में चली जाती है। इससे वास्तविक रूप से मेहनत करने वाले रोजगार सहायक को न तो काम का श्रेय मिलता है और न ही अतिरिक्त पारिश्रमिक।

संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन स्तर से अतिरिक्त कार्य के एवज में पारिश्रमिक का स्पष्ट प्रावधान और लिखित दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाते हैं, तो जिले के समस्त ग्राम रोजगार सहायक 2 अक्टूबर से कलम बंद कर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।

खबर : करण विश्वकर्मा – 9755432229