- नवनिर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दीवारों में दिखीं गहरी दरारें, बारिश से पहले ही सीलन के कारण उखड़ने लगा प्लास्टर
- स्वीकृत एस्टीमेट (DSR) के विपरीत अमानक सीमेंट, रेत और छड़ों के इस्तेमाल का आरोप; जन आरोग्य समिति ने पारित किया प्रस्ताव
- जांच रिपोर्ट और कमियां दुरुस्त होने तक भवन के हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाने व दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की अपील
छिंदवाड़ा: ग्राम जमुनिया में ग्रामीण आबादी को सुलभ एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया नवनिर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) भवन हस्तांतरण से पहले ही विवादों में घिर गया है। निर्माण एजेंसी द्वारा कराए गए कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली, अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की शिकायतें सामने आई हैं। भवन को स्वास्थ्य विभाग को सौंपे जाने से पूर्व ही इसकी मुख्य दीवारों, छत और कोनों में गहरी दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच के लिए जन आरोग्य समिति ने पास किया प्रस्ताव मामले की गंभीरता को देखते हुए जन आरोग्य समिति की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के समस्त सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि नवनिर्मित अस्पताल भवन का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाना नितांत आवश्यक है। समिति ने अपनी चिंताओं से अवगत कराते हुए जिला कलेक्टर छिंदवाड़ा के नाम ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों और समिति सदस्यों का कहना है कि यह भवन संपूर्ण क्षेत्र के स्वास्थ्य लाभ और आपातकालीन सेवाओं के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके निर्माण में किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

DSR मापदंडों की उड़ाई गईं धज्जियां कलेक्टर को भेजी गई शिकायत के अनुसार, संबंधित ठेकेदार और निर्माण एजेंसी द्वारा स्वीकृत तकनीकी मापदंडों एवं स्वीकृत एस्टीमेट (DSR) को ताक पर रखकर काम कराया गया है। भवन निर्माण में अमानक स्तर के सीमेंट, रेत, गिट्टी और पतली लोहे की छड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इतना ही नहीं, छत की वाटरप्रूफिंग का काम नाममात्र का हुआ है। आगामी मानसून से पहले ही सीपेज (सीलन) की वजह से अंदरूनी और बाहरी प्लास्टर उखड़ने लगा है, जिससे पहली ही बारिश में पूरे भवन में पानी टपकने का खतरा मंडरा रहा है।

खोखली टाइल्स और लीक हो रही पाइपलाइन भवन के अंदरूनी कार्यों की पोल भी खुलने लगी है। फर्श समतल नहीं बनाया गया है और टाइल्स लगाने में सीमेंट-मसाले का सही अनुपात उपयोग नहीं हुआ है, जिससे अधिकांश टाइल्स खोखली आवाज दे रही हैं वहीं, प्लंबिंग और बिजली कार्यों में भी भारी लापरवाही बरती गई है। घटिया फिटिंग्स के कारण पाइपलाइनों से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींव के पास पानी का रिसाव लंबे समय में भवन के ढांचे को बेहद कमजोर कर सकता है।
भविष्य में जान-माल का बना रहेगा खतरा शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यदि इस घटिया निर्माण वाले भवन को इसी जर्जर स्थिति में हस्तांतरित कर लिया जाता है, तो कल को यहां आने वाले मरीजों, महिला धात्रियों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पूरी तरह से खतरे में पड़ जाएगी।
ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर से की गई मुख्य मांगें:
- PWD या RES के वरिष्ठ इंजीनियरों की निष्पक्ष तकनीकी टीम गठित कर नवनिर्मित भवन का भौतिक निरीक्षण व सत्यापन कराया जाए।
- प्रयुक्त सीमेंट, कंक्रीट, ईंट और लोहे की गुणवत्ता की जांच हेतु अधिकृत प्रयोगशाला से ‘लैब टेस्ट’ रिपोर्ट प्राप्त की जाए।
- जब तक जांच पूरी नहीं होती और सभी तकनीकी कमियों को ठीक नहीं कर लिया जाता, तब तक भवन की हैंडओवर प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
- घटिया निर्माण कराने वाले संबंधित ठेकेदार तथा इस अनदेखी के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
खबर : करण विश्वकर्मा – 9755432229








