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लायंस आई हॉस्पिटल परासिया पर कानूनी शिकंजा: करोड़ों के गबन और बिना लाइसेंस मानव अंग निकालने के मामले में SIT जांच तेज

गिरफ्तारी के डर से प्रशासन को गुमराह करने की आरोपियों की कोशिशें नाकाम, समाजसेवी रिंकू चौरसिया ने खोला मोर्चा

छिंदवाड़ा / परासिया : लायंस क्लब एवं लायंस आई हॉस्पिटल परासिया में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन और बिना वैध लाइसेंस के अवैध रूप से मानव अंग (नेत्र कॉर्निया) निकालने व प्रत्यारोपण के गंभीर चिकित्सा अपराधों की जांच अब अपने अंतिम चरण में है। देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियां और प्रशासनिक अधिकारी इस संवेदनशील मामले में पूरी मुस्तैदी से कार्रवाई कर रहे हैं। अपनी संभावित गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई से बौखलाए संस्था के नामजद आरोपी अब सोशल मीडिया और भ्रामक शिकायतों के माध्यम से प्रशासन को गुमराह करने और मुख्य जांच को प्रभावित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।
यह बात क्षेत्र के प्रख्यात समाजसेवी और मुख्य शिकायतकर्ता रिंकू रितेश चौरसिया ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कही।

करोड़ों का वित्तीय गबन और कुर्की की कार्रवाई

समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने बताया कि राष्ट्रीय अंधत्व निवारण मिशन (भारत सरकार) के तहत प्राप्त शासकीय अनुदान में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन की शिकायत की गई थी। मध्य प्रदेश शासन द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच में यह शिकायत पूर्णतः सत्य पाई गई।

  • नामजद एफआईआर दर्ज: इसके परिणामस्वरूप थाना परासिया में दिनांक 10 जनवरी 2025 को अपराध क्रमांक 12/25 (धारा 420, 409, 34 के तहत) संस्था के सात प्रमुख पदाधिकारियों पर नामजद मामला दर्ज किया जा चुका है।
  • ये पदाधिकारी हैं आरोपी: पूरन राजलानी, पिंकेश पटोरिया, अनिल जैन, आलोक जैन, हरिशंकर साहू, कन्हैया राजलानी एवं जगजीत सिंह बिल्लू मान।
  • संपत्ति कुर्की: तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर संस्था की संपत्ति कुर्की व चश्पा की कार्रवाई भी तहसीलदार परासिया द्वारा पूर्व में ही संपादित की जा चुकी है।

25 वर्षों से बिना लाइसेंस मानव अंग निष्कर्षण, PMO के निर्देश पर SIT गठित

मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों से यह प्रमाणित हुआ है कि इस संस्था के पास मानव अंग निष्कर्षण, उत्कर्षण और प्रत्यारोपण का कोई भी वैध शासकीय पंजीयन या लाइसेंस (नोटा, सोटा, थोटा आदि) उपलब्ध नहीं है।
इसके बावजूद जिला छिंदवाड़ा में लायंस क्लब द्वारा विगत 25 वर्षों से अवैध रूप से हजारों मृत व्यक्तियों के नेत्रों (कॉर्निया) को निकाला और प्रत्यारोपित किया गया, जो कि सीधे तौर पर ‘मानव अंग तस्करी’ की श्रेणी में आता है।

इस अति-संवेदनशील मामले पर माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने तत्काल संज्ञान लिया, जिसके बाद मध्य प्रदेश स्वास्थ्य आयुक्त के आदेश पर मेडिकल कॉलेज छिंदवाड़ा के डीन की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (SIT) वर्तमान में इसकी गहन जांच कर रहा है।

कलेक्टर की ‘समय-सीमा’ (T.L.) बैठक में समीक्षा से आरोपियों में बौखलाहट

शिकायतकर्ता रिंकू रितेश चौरसिया ने तीन माह पूर्व माननीय जिला कलेक्टर छिंदवाड़ा के समक्ष ‘मंगलवार जनसुनवाई कार्यक्रम’ में समस्त पुख्ता और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए माननीय कलेक्टर महोदय ने इसे तत्काल समय-सीमा की बैठक के एजेंडे में शामिल कर त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इसी प्रशासनिक कड़े रुख और अपनी निश्चित गिरफ्तारी से बचने के लिए एफ.आई.आर. के मुख्य आरोपी पूरन राजलानी एवं उनके सहयोगियों द्वारा सोशल मीडिया पर चल रहे सत्य समाचारों को ‘भ्रामक’ बताकर प्रशासन को गुमराह करने के लिए झूठे शिकायती पत्र सौंपे जा रहे हैं।

जांच भटकाने का ड्रामा: रिंकू चौरसिया ने कहा, “आरोपियों द्वारा किया जा रहा यह प्रयास केवल और केवल माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर चल रही एस.आई.टी. की जांच को प्रभावित करने, जन-साधारण का ध्यान भटकाने और जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने का एक असफल ड्रामा है।”

निष्पक्ष और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग

माननीय कलेक्टर महोदय को लिखित पत्र सौंपकर मांग की गई है कि कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले इन तत्वों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले की प्रतिलिपि सादर सूचनार्थ माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली, माननीय स्वास्थ्य आयुक्त भोपाल, डीन मेडिकल कॉलेज छिंदवाड़ा एवं पुलिस अधीक्षक जिला छिंदवाड़ा को भी प्रेषित कर निष्पक्ष व त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

खबर : करण विश्वकर्मा – 9755432229