समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया के प्रयासों के बाद कलेक्टर ने बदला नियम; अब ₹600 के सुपर फॉस्फेट पर मिलेगा मनचाहा यूरिया
छिंदवाड़ा : क्षेत्र के अन्नदाताओं के हक में उठाई गई आवाज आखिरकार रंग लाई है। समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया के नेतृत्व में किसानों की समस्याओं को लेकर सौंपे गए ज्ञापन और कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने यूरिया खाद के साथ डीएपी (DAP) खाद की अनिवार्य टैगिंग (लेने की शर्त) को पूरी तरह से हटा दिया है। जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने तत्परता दिखाते हुए किसानों की इस जायज मांग को स्वीकार कर लिया और टैगिंग को तुरंत हटाने के आदेश दिए। इस जनहितैषी निर्णय के लिए समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया और क्षेत्र के समस्त किसानों ने जिला कलेक्टर का आभार व्यक्त किया है।
मक्का उत्पादकों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था
विगत दिनों रिंकू रितेश चौरसिया ने किसानों के हस्ताक्षर युक्त लिखित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपकर इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था कि छिंदवाड़ा जिले में सबसे अधिक मक्के की खेती होती है, जिसमें डीएपी से कहीं ज्यादा यूरिया खाद की आवश्यकता होती है। मुख्य समाचार पत्रों ने भी इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके फलस्वरूप यह उचित निर्णय सामने आया है।
ई-विकास प्रणाली: अब यह है नया प्रावधान
सोसाइटी से प्राप्त नवीनतम ई-विकास प्रणाली रजिस्ट्रेशन के अनुसार, अब डीएपी की अनिवार्य टैगिंग का पुराना प्रावधान पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत:
- किसानों को अब अनिवार्य रूप से महंगी डीएपी नहीं खरीदनी होगी।
- उन्हें मात्र ₹600 की एक बोरी सुपर फॉस्फेट लेनी होगी।
- इसके बाद किसान अपनी भूमि के औसत रकबे के अनुसार जितनी चाहें उतनी यूरिया खाद प्राप्त कर सकेंगे।
खबर : करण विश्वकर्मा – 9755432229








